जब पहली बार मिले थे
नरगिस और राज कपूर की पहली मुलाकात फिल्म आग (1948) के सेट पर हुई थी। राज उस वक्त एक यंग डायरेक्टर और एक्टर थे, और नरगिस इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रही थीं। दोनों के बीच की कैमिस्ट्री इतनी जबरदस्त थी कि उन्होंने एक साथ कई सुपरहिट फिल्में दीं—बरसात, आवारा, श्री 420, और चोरी चोरी जैसी फिल्में आज भी दर्शकों के दिलों में बसी हैं।
पर्दे के पीछे की मोहब्बत
फिल्मों के जरिए उनके बीच एक गहरा रिश्ता बनता गया। सेट पर साथ वक्त बिताना, सीन के बहाने करीब आना—धीरे-धीरे यह सिर्फ अभिनय नहीं रहा। राज और नरगिस दोनों ही एक-दूसरे के प्रति आकर्षित हो चुके थे। नरगिस के लिए राज सिर्फ एक को-स्टार नहीं, बल्कि उनके सपनों का साथी थे। वहीं राज, जो उस समय शादीशुदा थे, नरगिस की मासूमियत और खूबसूरती में खोते जा रहे थे।
इश्क़ की दास्तान, जो अधूरी रह गई
हालांकि दोनों का रिश्ता गहराता गया, लेकिन समाज और हालात ने उन्हें एक नहीं होने दिया। राज कपूर कभी अपनी पत्नी कृष्णा कपूर को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुए। सालों इंतजार करने के बाद, नरगिस ने आखिरकार इस रिश्ते से खुद को अलग किया और अभिनेता सुनील दत्त से शादी कर ली, जिन्होंने मदर इंडिया के सेट पर उनकी जान बचाई थी।
विरासत में मिली मोहब्बत
राज और नरगिस की प्रेम कहानी भले ही मुकम्मल नहीं हो पाई, लेकिन आज भी उनकी जोड़ी को लोग प्यार की मिसाल मानते हैं। आवारा हूं की धुन से लेकर प्यार हुआ इकरार हुआ की बारिश—इन गानों में आज भी उनका इश्क़ सांस लेता है।
निष्कर्ष:
राज कपूर और नरगिस की कहानी हमें ये सिखाती है कि सच्चा प्यार हमेशा साथ होना जरूरी नहीं होता। कभी-कभी प्यार बस एक खूबसूरत याद बनकर ही ज़िंदगी भर साथ निभाता है।