टूटे दिल की कहानी कोई नई नहीं होती, पर हर दिल की टूटन की आवाज़ अलग होती है।
यह कहानी है श्रेया की — एक आम लड़की, जिसकी दुनिया प्यार से शुरू हुई और टूटन से बदली, लेकिन अंत में उसने खुद को फिर से जीना सिखा दिया।
🌧️ जब सब कुछ अच्छा लग रहा था...
श्रेया और आयुष की मुलाकात सोशल मीडिया पर हुई थी। बातचीत कब गहराई में बदल गई, पता ही नहीं चला।
वो चैट्स, कॉल्स, मीठी बातें, हर रोज़ का “गुड मॉर्निंग” और “गुड नाइट” — सब कुछ जैसे किसी फिल्म का हिस्सा लग रहा था।
श्रेया ने अपने दिल का हर कोना आयुष के नाम कर दिया था। लेकिन... कहानियों की तरह असल ज़िंदगी में भी ट्विस्ट आते हैं।
💔 दिल का टूटना, खुद को खो देना...
एक दिन आयुष ने बस इतना कहा — “मुझे अब इस रिश्ते में दम नहीं लगता।”
कोई वजह नहीं, कोई बहस नहीं, बस एक चुपचाप विदाई।
श्रेया के लिए यह सिर्फ एक ब्रेकअप नहीं था, यह उसकी पहचान, आत्मविश्वास और हँसी का टूटना था।
वो घंटों चुप रहती, रोती, खुद से सवाल करती — “क्या मैं इतनी बुरी हूँ?”
वो खुद को आईने में देखना भी बंद कर चुकी थी।
🌱 फिर आया खुद से मिलने का वक़्त...
एक दिन उसने अपनी डायरी में लिखा —
“अगर मैं उससे इतना प्यार कर सकती हूँ, तो खुद से क्यों नहीं?”
बस वहीं से शुरुआत हुई।
- डिजिटल डिटॉक्स: उसने सोशल मीडिया से दूरी बना ली।
- सेल्फ केयर: खुद के लिए समय निकालना शुरू किया — योग, किताबें, संगीत।
- थेरेपी और जर्नलिंग: अपने जज़्बातों को कागज़ पर उतारने से उसे राहत मिली।
- दोस्ती: पुराने दोस्तों से फिर जुड़ना शुरू किया — जिनसे वो दूर हो गई थी।
💡 जो दर्द था, वही उसकी ताकत बना
आज श्रेया वही है — लेकिन पहले से ज़्यादा समझदार, सशक्त और खुश।
वो अब जानती है कि प्यार खोना अंत नहीं, बल्कि खुद को पाने की शुरुआत हो सकती है।
🔚 लेख से सीख:
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टूटना एक प्रक्रिया है, लेकिन जुड़ना भी मुमकिन है।
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अपने दर्द को दबाइए मत, उसे समझिए और उससे सीखिए।
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प्यार सिर्फ किसी और से नहीं होता, सबसे जरूरी है — खुद से प्यार।